हनुमान चालीसा (9श्लोक)

 हनुमान चालीसा के 9वें श्लोक का विस्तृत विवेचन:-

श्लोक:

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

भावार्थ:

हनुमानजी अत्यंत विद्वान, सद्गुणों से परिपूर्ण और अति चतुर हैं। वे श्रीराम के कार्यों को करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं।

विस्तृत विवेचन:

यह दोहा हनुमान चालीसा का एक महत्वपूर्ण अंश है, जिसमें तुलसीदासजी ने हनुमानजी के चार प्रमुख गुणों का वर्णन किया है—विद्वता, गुणवानता, चातुर्य और सेवाभाव।

1. विद्यावान (विद्वान)

हनुमानजी केवल बलशाली नहीं, बल्कि अपार ज्ञान से भी संपन्न हैं।

वे वेद, शास्त्र, व्याकरण और नीति में पारंगत हैं।

जब वे बाल्यावस्था में सूर्य को निगलने दौड़े, तब देवताओं ने उन्हें अमरत्व और ज्ञान का वरदान दिया था।

रामायण में वे सीता माता को सांत्वना देने, विभीषण को नीति समझाने और लंका जलाने जैसी चतुर योजनाएँ बनाने में अपनी विद्वत्ता का परिचय देते हैं।

2. गुनी (सद्गुणी)

हनुमानजी के चरित्र में दया, करुणा, विनम्रता, निःस्वार्थता, भक्ति, सेवा-भाव, धैर्य और संयम जैसे उच्च गुण हैं।

वे श्रीराम और माता सीता के प्रति अत्यंत विनम्र और समर्पित रहते हैं।

उनका प्रत्येक कार्य धर्म और सत्य की रक्षा के लिए होता है।

3. अति चातुर (अत्यंत चतुर)

हनुमानजी कुशल रणनीतिकार और व्यवहार-कुशल हैं।

उन्होंने सीता माता से मिलने के लिए अपनी चतुराई से अशोक वाटिका में प्रवेश किया।

विभीषण को श्रीराम के शरण में लाने और रावण के दरबार में अपनी बात दृढ़ता से रखने में उनकी चतुराई दिखती है।

संजीवनी बूटी लाने के समय भी वे अपनी बुद्धिमत्ता से कार्य करते हैं।

4. राम काज करिबे को आतुर (राम कार्यों को करने के लिए तत्पर)

हनुमानजी के जीवन का एकमात्र उद्देश्य श्रीराम की सेवा करना है।

वे बिना किसी संकोच और भय के श्रीराम के कार्यों को पूरा करने के लिए तत्पर रहते हैं।

लंका जाने, सीता माता की खोज करने, संजीवनी बूटी लाने और युद्ध में सहायता करने तक, वे हर कार्य में अग्रणी रहते हैं।

उनका समर्पण हमें सिखाता है कि भक्ति में संकल्प, सेवा और निःस्वार्थ भाव होना चाहिए

प्रासंगिकता और शिक्षा:

हनुमानजी के ये गुण हमें सिखाते हैं कि जीवन में केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि बुद्धि, गुण और सेवा-भाव भी आवश्यक हैं। हमें भी हनुमानजी की तरह विद्या अर्जित करनी चाहिए, सद्गुणों को अपनाना चाहिए, चतुराई से कार्य करना चाहिए और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।


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