हनुमान चालीसा (5श्लोक)
हनुमान चालीसा का 5वां श्लोक:-
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
व्याख्या:
1. महावीर विक्रम बजरंगी:
महावीर का अर्थ है महान वीर। हनुमान जी अपार शक्ति और साहस के प्रतीक हैं।
विक्रम यानी पराक्रम व परिश्रम। वे अपने बल और बुद्धि से असंभव को भी संभव बना देते हैं।
बजरंगी का तात्पर्य है कि वे वज्र के समान कठोर और दृढ़ हैं। यह नाम उन्हें इसलिए मिला क्योंकि वे इंद्र के वज्र से भी प्रभावित नहीं हुए थे।
2. कुमति निवार सुमति के संगी:
कुमति का अर्थ है नकारात्मक, दुष्ट और भ्रमित करने वाली बुद्धि। हनुमान जी ऐसी बुरी बुद्धि का नाश करते हैं।
सुमति के संगी का मतलब है कि वे सद्बुद्धि देने वालों के सच्चे साथी हैं।
जब कोई भक्त श्रद्धा से उनका स्मरण करता है, तो वे उसे सही मार्ग दिखाते हैं और जीवन में सफल बनाते हैं।
भावार्थ:
हनुमान जी असीम शक्ति के धनी हैं और धर्म की रक्षा करने वाले हैं। वे अपने भक्तों की बुरी बुद्धि को दूर कर सद्बुद्धि प्रदान करते हैं, जिससे व्यक्ति का जीवन उन्नत होता है।
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