हनुमान चालीसा (19श्लोक)
हनुमान चालीसा के 19वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:-
श्लोक:
"तुम्हारो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भय सब जग जाना।।"
भावार्थ:
हे हनुमानजी! विभीषण ने आपकी दी हुई शिक्षा और उपदेश (मंत्र) को स्वीकार किया। उसी के प्रभाव से वे लंका के राजा बने, और यह बात पूरे संसार में प्रसिद्ध हो गई।
विस्तृत विवेचन:
1. विभीषण का हनुमानजी पर विश्वास:
जब हनुमानजी सीता माता की खोज में लंका गए, तब उनकी भेंट विभीषण से हुई। विभीषण रावण के भाई थे, लेकिन वे धर्मप्रिय और श्रीराम के भक्त थे। हनुमानजी से मिलने के बाद विभीषण को श्रीराम की भक्ति का और भी अधिक विश्वास हुआ। उन्होंने हनुमानजी के उपदेश (राम-नाम का मंत्र) को अपनाया और श्रीराम की शरण में जाने का निश्चय किया।
2. विभीषण का लंका का राजा बनना:
विभीषण ने जब रावण को श्रीराम से शांति करने का सुझाव दिया, तो रावण ने उन्हें लंका से निकाल दिया। तब विभीषण श्रीराम की शरण में गए। श्रीराम ने उन्हें गले लगाया और आश्वासन दिया कि वे ही लंका के भावी राजा होंगे। रावण वध के बाद श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि हनुमानजी का दिया हुआ मंत्र सत्य और प्रभावशाली था।
3. हनुमानजी की कृपा:
हनुमानजी केवल बलशाली ही नहीं, बल्कि भक्तों को सही मार्ग दिखाने वाले महान गुरु भी हैं। उन्होंने विभीषण को सही मार्ग दिखाया, जिससे वे न केवल श्रीराम के परम भक्त बने, बल्कि लंका के राजा भी बने।
4. सारांश:
इस दोहे से यह शिक्षा मिलती है कि जो व्यक्ति भगवान के भक्तों (जैसे हनुमानजी) के उपदेशों को स्वीकार करता है और धर्म के मार्ग पर चलता है, उसे निश्चित रूप से विजय और सम्मान प्राप्त होता है।
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