हनुमान चालीसा (17श्लोक)
हनुमान चालीसा के 17वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"यम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि को बिधि कही सके कहां ते।।"
भावार्थ:
इस चौपाई में तुलसीदास जी हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यमराज, कुबेर, और दसों दिशाओं के रक्षक देवता (दिग्पाल) भी जिनकी महिमा का बखान करते हैं। तब फिर सामान्य कवि और स्वयं ब्रह्मा (बिधि) भी उनकी महिमा को पूरी तरह कैसे वर्णन कर सकते हैं?
विस्तृत विवेचन:
1. यमराज (यम) – मृत्यु के देवता यमराज, जो स्वयं कर्मानुसार जीवों को न्याय देने वाले हैं, वे भी हनुमान जी की शक्ति और भक्ति को नमन करते हैं। हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त है, इसलिए यमराज भी उनके प्रभाव से परिचित हैं।
2. कुबेर – धन के देवता कुबेर, जो देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं, वे भी हनुमान जी की भक्ति और शक्ति की स्तुति करते हैं। यह संकेत करता है कि हनुमान जी केवल बल और भक्ति के प्रतीक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि के भी प्रतीक हैं।
3. दिग्पाल (दसों दिशाओं के रक्षक) – दिशाओं के अधिपति, जैसे इंद्र (पूर्व), अग्नि (दक्षिण-पूर्व), यम (दक्षिण), नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), वरुण (पश्चिम), वायु (उत्तर-पश्चिम), कुबेर (उत्तर), ईशान (उत्तर-पूर्व), और अन्य सभी दिशाओं के रक्षक भी हनुमान जी की स्तुति करते हैं। यह दर्शाता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में उनकी महिमा व्याप्त है।
4. कवि और बिधि (ब्रह्मा) – तुलसीदास जी कहते हैं कि यदि स्वयं ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) और बड़े-बड़े कवि भी हनुमान जी की महिमा का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते, तो फिर सामान्य मनुष्य या कवि उनकी वास्तविक महिमा को कैसे व्यक्त कर सकते हैं?
सारांश:
यह चौपाई हनुमान जी की महिमा की असीमता को प्रकट करती है। उनकी स्तुति केवल ऋषि-मुनि ही नहीं, बल्कि देवता, दिग्पाल और स्वयं ब्रह्मा भी करते हैं। उनकी शक्ति और भक्ति को शब्दों में पूरी तरह बांध पाना असंभव है।
Comments
Post a Comment