हनुमान चालीसा (16श्लोक)
हनुमान चालीसा के 16वें श्लोक का विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।"
भावार्थ:
इस दोहे में यह बताया गया है कि सनकादि ऋषि, ब्रह्मा जी, बड़े-बड़े मुनि, नारद जी, सरस्वती जी और अहिरावण सहित सभी संत-मुनि और देवता हनुमान जी की महिमा का गुणगान करते हैं।
विस्तृत विवेचन:
1. सनकादिक ऋषि – सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार चार ब्रह्मर्षि हैं, जो सदा ब्रह्मज्ञान में स्थित रहते हैं। वे हनुमान जी के गुणों को गाते हैं क्योंकि हनुमान जी पूर्ण भक्त और ज्ञानी हैं।
2. ब्रह्मादि मुनीसा – स्वयं ब्रह्मा जी और अन्य महर्षि, जैसे वशिष्ठ, अत्रि, कश्यप आदि भी हनुमान जी की भक्ति व पराक्रम की सराहना करते हैं।
3. नारद – देवर्षि नारद, जो भक्ति योग के प्रचारक हैं, वे भी हनुमान जी की आराधना करते हैं क्योंकि वे भक्ति और सेवा के सर्वोत्तम उदाहरण हैं।
4. सारद (सरस्वती देवी) – विद्या और वाणी की देवी सरस्वती भी हनुमान जी के गुणों को व्यक्त करने में समर्थ नहीं हैं, क्योंकि उनकी महिमा असीम है।
5. अहीसा (सर्पों के राजा)–सर्पराज शेषनाग भी उनकी महिमा का गुणगान करते हैं
सारांश:
यह चौपाई दर्शाती है कि हनुमान जी की महिमा को ऋषि-मुनि, देवता और सर्पराज भी स्वीकारते हैं। उनकी भक्ति, ज्ञान और पराक्रम सभी लोकों में पूजनीय है।
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