हनुमान चालीसा (11श्लोक)
हनुमान चालीसा के 11वें श्लोक का विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। विकट रूप धरि लंक जलावा।।"
भावार्थ:
1. "सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा" – हनुमान जी ने अत्यंत लघु रूप धारण कर माता सीता को अशोक वाटिका में अपने दर्शन दिए। इसका अर्थ यह है कि वे अपनी इच्छानुसार किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं और अपने भक्तों को सांत्वना प्रदान कर सकते हैं।
2. "विकट रूप धरि लंक जलावा" – जब रावण की सेना से युद्ध का समय आया, तब हनुमान जी ने विकराल और भयंकर रूप धारण कर लंका को भयभीत कर दिया। इसका अर्थ यह है कि वे आवश्यकता पड़ने पर अजेय और विनाशकारी रूप धारण कर सकते हैं।
विस्तृत विवेचन:
हनुमान जी की यह विशेषता है कि वे समयानुसार और परिस्थिति के अनुसार अपना स्वरूप बदल सकते हैं। जब वे माता सीता से मिलने गए, तब विनम्रता और श्रद्धा का परिचय देते हुए सूक्ष्म रूप धारण किया ताकि उन्हें भय न हो। दूसरी ओर, जब लंका में अपना प्रभाव दिखाने की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने विकराल रूप धारण कर पूरी लंका को हिला दिया।
यह दो गुणों का प्रतिनिधित्व करता है:
विनम्रता और धैर्य: जब सेवा और भक्ति की आवश्यकता हो, तब विनम्रता से कार्य करना चाहिए।
पराक्रम और साहस: जब अन्याय और अधर्म के खिलाफ खड़ा होना हो, तब प्रचंड रूप धारण करना चाहिए
हनुमान जी का यह रूप हम सभी को सिखाता है कि हमें भी समयानुसार धैर्य और पराक्रम का संतुलन बनाए रखना चाहिए।
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