हनुमान चालीसा (7श्लोक)

 श्लोक:


"हाथ बज्र और ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेऊ साजे।।"


यह चौपाई हनुमान चालीसा से ली गई है और श्री हनुमान जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है।

शब्दार्थ:

1. हाथ बज्र और ध्वजा बिराजे – हनुमान जी के हाथ में बज्र (इंद्र द्वारा प्रदत्त शस्त्र) और ध्वजा (केसरिया विजय पताका) शोभायमान है।

2. कांधे मूंज जनेऊ साजे – उनके कंधे पर मूंज (एक प्रकार की घास से बनी पवित्र जनेऊ) धारण है, जो ब्रह्मचर्य और धार्मिकता का प्रतीक है।

भावार्थ:

1. पराक्रम और विजय का प्रतीक – बज्र शक्ति, साहस और अपराजेयता को दर्शाता है, जबकि ध्वजा उनकी विजय और धर्म की रक्षा के प्रति उनकी निष्ठा को व्यक्त करती है।

2. धार्मिकता और तपस्वी स्वरूप – जनेऊ यह इंगित करता है कि हनुमान जी केवल बलशाली ही नहीं, बल्कि विद्वान, धार्मिक और ब्रह्मचर्य के पालनकर्ता भी हैं।

विस्तृत विवेचन:

हनुमान जी का स्वरूप केवल बल और पराक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे धर्म, ज्ञान, और भक्ति के भी प्रतीक हैं। उनका बज्र यह दर्शाता है कि वे दुष्टों का नाश करने में सक्षम हैं, जबकि ध्वजा यह दर्शाती है कि वे धर्म की विजय के लिए समर्पित हैं। कंधे पर धारण किया गया जनेऊ उनके विद्वान और संयमशील होने का संकेत देता है।

इस चौपाई का गहरा संदेश यह है कि सच्ची शक्ति वही होती है जो धर्म, आस्था और संयम से युक्त हो।

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