हनुमान चालीसा (4श्लोक)

 राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनी पुत्र पवनसुत नामा॥

व्याख्या:

1. राम दूत:

हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त और संदेशवाहक हैं।

वे श्रीराम के आदर्शों को पूरे विश्व में स्थापित करने वाले हैं।

सुग्रीव-राम मित्रता कराने से लेकर सीता माता की खोज और लंका विजय में उन्होंने दूत के रूप में महान भूमिका निभाई।

2. अतुलित बल धामा:

अतुलित का अर्थ है जिसकी तुलना न की जा सके।

बल धामा यानी हनुमान जी अपार शक्ति के भंडार हैं

उनका बल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और भक्ति का भी प्रतीक है।

उनके बल के आगे कोई देवता, राक्षस या यक्ष भी टिक नहीं सकता।

3. अंजनी पुत्र:

हनुमान जी माता अंजना के पुत्र हैं, इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र कहा जाता है।

माता अंजना एक अप्सरा थीं, जिन्होंने भगवान शिव से पुत्र प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी।

उनके कारण ही हनुमान जी में अद्भुत दिव्य शक्तियाँ आईं।

4. पवनसुत नामा:

हनुमान जी को पवनसुत (पवन देव के पुत्र) कहा जाता है।

उनके जन्म की कथा के अनुसार, जब माता अंजना तपस्या कर रही थीं, तब वायु देव की कृपा से भगवान शिव के अंश रूप में हनुमान जी का जन्म हुआ।

इस कारण उनमें वायु की गति, शक्ति और अजेयता आई।

पवन देव ने हनुमान जी को आकाश में उड़ने, तीव्रगति से चलने और अपार बल की शक्ति प्रदान की।

भावार्थ:

हनुमान जी भगवान राम के प्रिय सेवक और दूत हैं। वे अतुलनीय शक्ति के धनी हैं, जो किसी भी सीमा में नहीं बंधी। माता अंजना के पुत्र और पवन देव के आशीर्वाद से वे असीम बल, वेग और ऊर्जा से भरपूर हैं। उनकी भक्ति और शक्ति का कोई मुकाबला नहीं।

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