हनुमान चालीसा (3श्लोक)

 हनुमान चालीसा 3श्लोक और उसका विवेचन 

श्लोक:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

विवेचन:

इस दोहे में हनुमान जी की महिमा का वर्णन किया गया है—

1. ज्ञान और गुणों के सागर:

हनुमान जी को "ज्ञान गुन सागर" कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे अपार ज्ञान और सद्गुणों के भंडार हैं। वे वेद-शास्त्रों में निपुण, कुशाग्र बुद्धि और नीति तथा धर्म के ज्ञाता हैं।

2. तीनों लोकों में प्रसिद्ध:

"जय कपीस तिहुँ लोक उजागर"—हनुमान जी को वानरराज (कपीस) कहा गया है और वे तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) में विख्यात हैं। उनकी भक्ति, शक्ति और पराक्रम की कीर्ति संपूर्ण सृष्टि में फैली हुई है।


भावार्थ:

हनुमान जी असीम ज्ञान और सद्गुणों के स्वामी हैं। वे भूत, भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं तथा अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। उनका तेज तीनों लोकों में व्याप्त है, जिससे वे सर्वत्र पूज्य हैं।


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