हनुमान चालीसा (8श्लोक)

 हनुमान चालीसा का 8वां श्लोक 

श्लोक:

"शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।"

यह चौपाई हनुमान चालीसा से ली गई है और हनुमान जी के पावन स्वरूप, तेज, प्रताप एवं महिमा का वर्णन करती है।

शब्दार्थ:

1. शंकर सुवन – भगवान शिव के अंश से प्रकट हुए (शंकर जी के पुत्र समान)।

2. केसरी नंदन – केसरी (हनुमान जी के पिता) के पुत्र।

3. तेज प्रताप – अपार तेजस्विता और प्रताप (प्रभावशाली शक्ति) से युक्त।

4. महा जग वंदन – जिनकी समस्त संसार में वंदना (पूजा-अर्चना) होती है।

भावार्थ:

1. शंकर सुवन केसरी नंदन – शिव के अंशावतार और केसरी के पुत्र

हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है। वे शिव के अंश से प्रकट हुए, इसलिए उन्हें "शंकर सुवन" कहा जाता है। साथ ही, वे वानरराज केसरी के पुत्र हैं, इसलिए "केसरी नंदन" कहलाते हैं।

इससे यह प्रतीत होता है कि हनुमान जी में शिव का अद्भुत बल, भक्ति और ज्ञान समाहित है। वे शिव के कृपापात्र हैं और त्रिलोकी में पूजनीय हैं।

2. तेज प्रताप महा जग वंदन – अनंत तेजस्वी और पूज्य

हनुमान जी का तेज (आंतरिक और बाहरी शक्ति) अपार है। वे अत्यंत प्रभावशाली हैं और असुरों के संहारक हैं। उनका पराक्रम ऐसा है कि स्वयं भगवान राम ने उनकी शक्ति की प्रशंसा की।

"महा जग वंदन" का तात्पर्य है कि हनुमान जी केवल धरती पर ही नहीं, बल्कि समस्त लोकों में पूजनीय हैं। देवता, ऋषि-मुनि, और स्वयं भगवान भी उनकी भक्ति व निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हैं।

विस्तृत विवेचन:

1. शिव के अंश होने के कारण हनुमान जी अजर-अमर और महाबलशाली हैं। उनकी बुद्धि, भक्ति, और पराक्रम अतुलनीय है।

2. उनका तेज और प्रताप उन्हें देवताओं एवं समस्त लोकों में पूजनीय बनाता है। वे न केवल शक्ति के प्रतीक हैं बल्कि भक्ति, सेवा, और विनम्रता का भी सर्वोच्च उदाहरण हैं।

3. हनुमान जी को सम्पूर्ण ब्रह्मांड में वंदनीय माना गया है। उनका स्मरण करने मात्र से भय, बाधाएं और कष्ट दूर हो जाते हैं।

इस चौपाई का गहरा संदेश यह है कि सच्ची शक्ति का आधार भक्ति, निःस्वार्थता और धर्म के प्रति अटूट समर्पण होना चाहिए। हनुमान जी की उपासना से मनुष्य में शक्ति, निर्भयता और समर्पण की भावना जाग्रत होती है।


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